Friday, 19 July 2013



गंदगी और कूड़े के ढेर पर बनता है आँगन बाडी का खाना ,चाहूं और है गंदगी का पसारा

  GURVINDER PANNU
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खंड डबवाली के गांव मौजगढ़ढ में आँगन बाड़ी
एक तरफ जहाँ सरकार आंगन बाड़ी केन्द्रों के सञ्चालन में सरकारी धन को लूट रही सरकारी मशीनरी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने हर आंगन बाड़ी केंद्र पर 11 रजिस्टर रखने और उन्हें अपडेट रखने का शासनादेश जारी किया है|  यहाँ
अशिक्षा की वजह से लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरुक नहीं। कुपोषण के शिकार नौनिहाल मौत के काल में समा जाते। जरा सी सावधानी बरतने से नौनिहालों को बचाया जा सकता है। बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास तथा स्वास्थ्य व पोषण की स्थिति में सुधार लाना, कुपोषण से बचाना। शिशुओं की सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
 
मगर उन्हें आँगनबाड़ी  गम्भीर रूप से कुपोषण की शिकार बच्चों के लिए लिए हर गांव  में आँगनबाड़ी केन्द्र खुलवा चुकी है |आँगन बाड़ी केन्द्र में लगभग 70 बच्चे नामांकित हैं|आंगनबाड़ी केन्द्र-यहां आंगनबाडी केन्द्र बड़ी सफलता से चल रहा है पर भवन के बाहर की हालत बड़ी खराब है। यहां बच्चों के पोषण का ध्यान रखा जाता है तथा यहां बच्चों के लिए सरकार द्वारा र्निधारित चार्ट के अनुसार पौष्टिक भोजन दिया जाता है। इसमे एक आंगनबाड़ी बहनजी तथा एक सहायिका काम करती हैं। वहीं हारनी की बात यह है कि यहा आज तक किसी व अधिकारी ने सुध नहीं ली है कि आँगन बाड़ी के बाहर कैसी दुर्दशा है |


 
वायस ओवर :1 जब इस विषय में आँगनबाड़ी कार्यकर्ता से बात की गयी तो उन्होने ने बताया कि वो कई बार सरपंच, वीं डी पी ओ  ,एस डी एम के पास लिखित रूप में शिकायत दर्ज करवा चुके है |लेकिन अभी तक कोइ भी सुनवायी नहीं हुई मजबुरी बस उनकों कूड़े के ढेर पर ही खाना बनाना पड़ता है |



मंडी डबवाली जी टी रोड हाईवे नम्बर 10 पर ओवर ब्रिज कि माँग को लेकर सांकेतिक भुख हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन कर दी चेतावनी ,रेलवे फाटक पर जाम से डबवाली वासी परेशान

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****गौरतलब है कि डबवाली शहर अहमदाबाद जम्मू रेल मार्ग का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है।
*****डबवाली शहर रेलवे लाईन के दोनों और बसा हुआ है
एंकर रीड :**********
हजका भाजपा के कार्यकर्ता नेता देवकुमार शर्मा के निर्देश में एस डी एम कार्यालय  के बाहर रोष मुजाहिरा किया गया जिसमे उन्होने बताया कि डबवाली में ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए करीब तीन दशक पूर्व रेल विभाग ने डबवाली के जीटी रोड रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज बनाने की योजना को हरी झंडी दी थी। लगभग सभी राजनीतिक दलों ने भी ओवरब्रिज निर्माण को चुनाव के समय मुद्दा बनाया और सत्ता में आने पर ओवरब्रिज का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर करवाने का वादा भी किया। लेकिन इस सब के बावजूद ओवरब्रिज का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है।
वायस ओवर :1
ओवरब्रिज का निर्माण नहीं हो पाने से शहर में ट्रैफिक समस्या लगातार विकट होती जा रही है और इस समय इसने गम्भीर रूप ले लिया है। डबवाली-अहमदाबाद-जम्मू रेलवे लाइन पर एक अति व्यस्त रेलवे स्टेशन है। यहां से 24 घंटे में चार दर्जन के करीब माल तथा यात्री गाडिय़ां गुजरती हैं। करीब आधे घंटे में औसत एक गाड़ी डबवाली से हो कर गुजरती है। गाडिय़ों के आने-जाने के समय दोनों रेलवे फाटक बंद हो जाते हैं और कई बार तो करीब-आधा-आधा घंटा तक बंद ही रहते हैं। फाटक बंद होने पर दोनों फाटकों पर वाहनों की लम्बी कतारें लग जाती हैं। जीटी रेाड अति व्यस्त सड़क मार्ग होने से जीटी रोड रेलवे फाटक पर तो समस्या और भी गम्भीर बन जाती है।
वायस ओवर :2
डबवाली के लोग शहर की ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए लगातार जीटी रोड रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण करवाने की मांग करते आ रहे हैं। लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव के समय डबवाली के लोगों को ओवरब्रिज बनवाने का आश्वासन देती हैं। लेकिन डबवाली के लोगों को इस मामले में आज तक आश्वासन के झुनझुने के अलावा कुछ नहीं मिल पाया।
वायस ओवर :3
गाडिय़ों के आने के समय दोनों रेलवे फाटक बंद हो जाते हैं। जिससे इनके दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतारे लग जाती है, जिससे यहां हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। शहर के लोगों विशेष कर स्कूली छात्र-छात्राओं को को रेलवे लाईन के एक से दूसरी और शहर में आने जाने के लिए फाटक क्रास करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय राजमार्ग से हो कर दिन रात में हजारों वाहन गुजरते हैं। जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग हर समय अति व्यस्त रहता है।

सड़क पर बिछे पथरो ने लोगो का  आना जाना किया मुहाल,हर रोज़ होता कोइ ना कोइ एक हादसा

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डबवाली से चौटाला रोड की सड़क का निर्माणकार्य पिछले लगभाग 4 महीनों से चल रहा है ,जोकि पहले यह सिंगल थी और अब इसको डबल  किया जा रहा है लेकिन सड़क पर पथर इस कदर बिछाया गया है कि वो हररोज किसी ना किसी एक जानलेवा दुर्घटना को बुलावा दे रहा है |भारी वाहनों के टायरो के दवाब  से पथर  इस कदर चलता है कि मानो हंड्ग्रैंड चला हो इसकी चपेट में अने वाला चाहे कार या बाइक या फिर साइकिल या पैदल राहगीर हो उसका भारी नुकसान हो सकता है |
वायस  ओवर : 1 जिसके चलते महिंद्रा एजेंसी का बड़ा शीसा टूट कर चकना चूर हो गया और एक बड़ा हादसा टल गया और सामने बैठी रिसेप्शनईस्ट बाल बाल बच गयी |क्योकि यह बहुत ही व्यस्त सड़क है जिसपर लोगो की ज्यादा आवा जावी रहतीं है ,क्योकि शहर के तमाम बैंक   ,एजेंसी सिविल हॉस्पिटल ,कचेहरी अनाज मंडी का भी यही रास्ता है |


वायस ओवर : 2 वहीं जब इस विषय में एस डी ओ से बात की गयी तो उन्होने कहा कि यह काम बड़े स्तर पर चल रहा है और हमारेपास  1 साल का टाइम है और सड़क के दोनो और नाले का काम चल रहा है | हम जल्दी ही इसको पुरे कराएँगे |

 सरकारी दावे झूठे ...मज़बूरी पढ़ा रही है बच्चों को...,प्राथमिक और मिडल स्कूल में घुटता है बच्चों का दम ,कमरों की तंगी और सुविधाओं का अभाव | 

 कक्षा नहीं ,स्टोर रूम सब कुछ |

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***प्राथमिक पाठ्शाला में बच्चे 400 कमरे 3, मिडल में कमरे 2, बच्चे 200
***बच्चों को पढने में होती घुटन महसूस ,
**3 साल पहले हुआ था स्कूल का एजु सैट भी चोरी ,
**टीचर जेब खर्चे से रखे हुए स्वीपर
**खुले आसमान में बनता है मिड डे मील का खाना
*** खुले में सड़ रहा है मिड डे मील का अनाज
**ना पीने का पानी और ना ही लाइट की सही व्यवस्था
**बच्चों ने जताया खेद ,हमे भी चाहिए खेल का मैदान और सामान
**गर्मी होने के कारण बाहर ही लगती है क्लासे
** टीचरो ने भी माना जगह और कमरे ना होने के कारण हम भी हो चुके है बहरे
मंडी डबवाली :
एंकर रीड :
कहने को तो सरकार सर्वंशिक्षा अभियान के तहत जिले में कोई ऐसा स्कूल नहीं जहां सुविधाओं का अभाव हो लेकिन इस बात का सबसे बड़ा हैरान कर देने वाला सबूत यह कि मंडी
डबवाली के प्राथमिक पाठ्शाला  नबर 3 और मिडल स्कूल में ना ही तो बच्चों के बैठने के लिए कोई क्लास रूम है ना ही मिड डे मील के लिए शेड है और ना अनाज रखने के लिए स्टोर है ना किचन  बल्कि सब कुछ राम भरोसे ही है |यहां तक कि 400 बच्चों के लिए महज 3 कमरे है 
वायस ओवर 1:
एक मजबूत शिक्षा प्रणाली किसी भी देश के विकास और समृद्धि का आधार है | जहां एक ओर सरकार और शासन हर बच्चे को पढ़ाने के लिए दिन प्रतिदिन नई योजनाए बना रहा है, करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे वहीं स्कूल में हालात ये है कि कमरों और मैदान के अभाव में विद्यार्थी ना ठीक से पढ पा रहे ना ही बैठने के लिए जगह है बल्कि भेड़ बकरियों की तरह उन्हे मजबूरी से बैठ कर पढना पड़ता है | यहाँ तक कि इस तंग शिक्षित प्रणाली से पढ़ाने वाले टिचरो के कान भी बहरे हो चुके है| बस इस मजबूरी और गर्मी ने बच्चों को लाचार और सरकार के सर्वंशिक्षा अभियान के ड्रामे ने मजबूरी को पढने के लिए मजबूर कर दिया है|
वायस ओवर 2 :
स्कूल में हालत ये है कि जिस कमरे में क्लास लगती है वहीं बच्चे भी बैठते है और मिड डे मिल का राशन भी रहता है और किचन का सामान भी इतना ही नहीं बल्कि स्कूल का रिकॉर्ड भी यही रखा हुआ है जगह जगह बिजली की तारे नंगी पड़ी है और यह कभी भी किसी भी हादसे को अंजाम दे सकती है |ऎसे लागत है यह पाठ्शाला ना होकर भेड़ बकरियों का बाड़ा हो बस मजबूरी ही बच्चों को पढ़ा रही है |
वहीं बच्चों का मानना है कि उन्हें आज तक ना खेलने का समान मिला है ना ही मैदान बस वो यहा चारदिवारी में कैद है, ना उनकों टिचरो की समझ आती है ना टिचरो को हमारी ,हमे क्लास में पढते समय घुटन महसूस होती है और दम भी घुटता है |
वायस ओवर 4 :
यहा तक की बच्चों को पानी की बोतलें भी घर से लेकर आनी पडती है , अगर स्कूल में पानी आता भी है तो बेहद गर्म होता है,ना पीने के लायक बच्चों का कहना है कि पानी का स्वाद भी खारा हैऔर ना सेहतके लिए लाभदायक होता है | और ,बारिश आने पर स्कूल तालाब में तबदील हो जाता है |अध्यापक भी अपना पानी घर से लेकर आते है | ऎसे में सवाल यह उठता है कि जो बच्चे यह सबकुछ करने में असमर्थ है उन्हें इस मजबूरी को मानना पड़ेगा |
वायस ओवर 5 :
जहाँ सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर हर स्कूल में एजु सेट सिस्टम की शुरुआत की थी वो भी महज डकोसला नजर आता है , अगर बात करे इस प्राथमिक विद्यालय की तो यहा का एजु सेट सिस्टम भी 3 साल पहले ही चोरों की बलि चढ़ चुका है एफ आई आर दर्ज होने के बावजूद भी आज तक कोइ अता-पता नहीं लग पाया और ना ही नया दिया गया है ,बल्कि एजु सेट सिस्टम की ट्रॉली महज कूड़ेदान और किताबों का बॉक्स बन कर रही गयी | बल्कि अध्यापकों का यह भी कहना है स्कूल में कोई भी चौकीदार ना होने के कारण हर रोज़ कुछ ना कुछ चोरी जरूर होता है |
वायस ओवर 6 :
राजकीयकृत मिडल और प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे-मिल का राशन भी खुले में पड़ा रहता है यह अनाज खुले में ही सड़ रहा और खुले में पड़ा है पैरों के निचे आ रहा है | ऎसे में अध्यापकों की भी मज़बूरी है कि वो अब रखे कहा क्योकि जहां क्लास लगती है वहीं सारा सामान भी होता इतना ही नहीं किचेनशेड के अभाव में धूल व कणयुक्त खाना खाने को छात्र विवश है। ज्ञात हो कि कलोनी रोड पथ पर स्थित विद्यालय में किचेनशेड न बनने के चलते मुख्य सड़क से सटे खुले मैदान में बन रहे मिड-डे-मिल में सड़क से जाने वाले वाहनों से उड़ने वाला धूलकण उड़कर बन रहे खाना में जा मिलता है। वही भोजन करने को छात्र विवश है। छात्राओं ने बताया कि ऐसा खाना खाते समय सड़क का धूलकण दातों तक किरकिर करता है। इसकी शिकायत हमलोग शिक्षकों से कई बार किये है। परन्तु सब लोग कहते हैं कि सरकार किचनेशेड नहीं बना रही है तो हमलोग क्या करें, बताया जाता है कि धूलकण युक्त खाना खने से छात्रों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिससे कई बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है।

वायस ओवर 7 :
वहीं जब खंड शिक्षा अधिकारी संत कुमार से बात की गयी तो उन्होने ने बताया कि हमारे पास कोइ भी शिकायत नहीं पहुँची है,बस इतना जरूर कहा कि वाक्य ही हालत चिंताजनक है | जबकि यह स्कूल शहर के अंदर है और यहा तक कि  यह स्कूल कार्यालय से महज 1 किलोमीटर दूर् है अधिकारी शहर में तो स्कूल जाँच कर ही सकते है लेकिन जब संत कुमार से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने ने कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया बल्कि जगह का तंग होना ही बताया और कहा कि हम जिला शिक्षाअधिकारी से बात करेगें और जल्द ही मै भी इस स्कूल का दौरा करूँगा |


वायस ओवर  8:
वहीं प्राथमिक पाठ्शाला नबर 3 के मुख्य अध्यापक राजेन्द्र कुमार ने बताया कि हमे पढ़ाने में बहुत दिक्कत होती क्योंकि स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त  जगह नहीं है ना ही हमारे लिए कार्यालय है और ना स्कूल के पास मिड डे मील के लिए अनाज भंडार और किचनशेड नहीं है |हमारा अनाज भी खराब हो रहा है और पैरों के नीचे आ रहा है | ना ही कोई पीने के पानी कि व्यवस्था है हमे भी पानी घर से लेकर आना पड़ता है
हम सब काम अपनी जेब खर्च से कर रहे है और आज 3 साल बीत जाने के बाद भी हमे एजु सैट नहीं मिल पाया है और ना ही कोई स्वीपर और चौकीदार दिया गया बल्कि और सभी स्कूलों के पास पार्ट टाइम स्वीपर है और एजु सैट चौकीदार है जिसकी वजह से हमारे यहां हर रोज़ चोरी होती है और हमारी कोई भी सुनवाई  नहीं हुई है | 

मंदिर तोडऩे को लेकर भड़के ग्रामीण

ए1तेहलका
पीडब्लयूडी (बीएण्डआर) द्वारा स्टेट हाईवे नंबर 32 पर स्थित गांव चकफरीदपुर (दारेवाला) में स्थित हनुमान मंदिर तोडऩे को लेकर ग्रामीण ने विभाग के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके गांव में करीब 30 वर्ष पहले लोगों के सहयोग से हनुमान मंदिर का निर्माण करवाया गया था। लेकिन बीते दिन पीडब्लयूडी के कर्मचारियों ने बिना किसी सूचना के दिए मंदिर को तोडऩा शुरू कर दिया और कर्मचारियों ने मंदिर के आसपास पड़ी ईंटें भी अपने ट्रक में भर ली। ग्रामीणों ने जब मंदिर को तोडऩे की वजह पूछी तो कर्मचारियों ने कहा कि उनको तो उच्चाधिकारियों के आदेश हैं जिसके आधार पर वे यह काम कर रहे हैं। ग्रामीण लालचंद, राजाराम, जगदीश, प्रेमकुमार, प्रदीप, नरेन्द्र, राजु, संदीप, बृजलाल, सुरेन्द्र, रामकुमार, राजेश, रणवीर, हैप्पी व अनिल आदि ने बताया कि मंदिर को नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा। लोगों का कहना है कि मंदिर को तोडऩे का काम पीडब्लयूडी विभाग के कहने पर किया गया है और जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। वहीं ग्रामीणों के बढ़ते गुस्से को देखकर मौके पर मौजूद पीडब्लयूडी के कर्मचारी वहां से चले गए। ग्रामीणों ने कहा कि अगर भविष्य में कर्मचारियों द्वारा इस प्रकार की हरकत की गई तो वे सड़कों पर आने से पीछे नहीं हटेंगे।
पीडब्लयूडी विभाग के जेई परमजीत सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता आप एसडीओं से बात करें।
वहीं विभाग के एसडीओ अनिल भारद्वाज ने बताया कि विभाग के आदेशानुसार मंदिर को रोड़ से हटाया जा रहा है।